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जैनाब अंसारी रेप केस में न्याय कर पाकिस्तान ने कायम की मिसाल, भारत में भीड़ ने दी सज़ा-ए-मौत

जैनाब अंसारी रेप केस में न्याय कर पाकिस्तान ने कायम की मिसाल, भारत में भीड़ ने दी सज़ा-ए-मौत

आमतौर पर फास्ट ट्रैक कोर्ट्स होने के बावजूद रेप केस व एसिड अटैक पीड़ितों को आसानी से न्याय नहीं मिल पाता है। ऐसे में पाकिस्तान ने अपने यहां हुए एक रेप केस में तुरंत फैसला सुनाकर सभी देशों के लिए एक मिसाल कायम की है। वहीं, भारत के अरुणाचल प्रदेश में लोगों ने आरोपियों को खुद ही सज़ा देकर एक केस को खत्म किया है।


पार हुई निर्ममता की हद


पाकिस्तान के कासुर जिले में रहने वाली 6 साल की जैनाब अंसारी रोज़ की तरह अपनी कुरान क्लास के लिए निकली थी पर उस समय किसी को नहीं पता था कि वह दिन उस मासूम की ज़िंदगी का आखिरी दिन होगा। 4 जनवरी 2018 को गायब हुई जैनाब जब तय समय पर घर नहीं पहुंची तो उसकी तलाश शुरू की गई और पांच दिन बाद, यानि कि 9 जनवरी को पुलिस को हंसती-खेलती जैनाब की जगह उसकी बॉडी मिली थी। बच्ची की ऑटोप्सी करवाने पर रिपोर्ट में सामने आया कि उसका अपहरण कर उसका रेप किया गया था। सिर्फ इतना ही नहीं, इस घिनौने कृत को अंजाम देने के बाद जैनाब की हत्या कर उसके शरीर को कूड़ेदान में फेंक कर आरोपी भाग गया था। इस घटना का खुलासा होने के बाद पूरा कासुर जिला शोक और आक्रोश से भर गया था। हर कोई जल्द से जल्द उस आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही इंसाफ की मांग भी कर रहा था। रेप व हत्या की इस घटना के बाद पाकिस्तान में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद पुलिस भी काफी सक्रिय हो गई थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि इन प्रदर्शनों में आरोपी भी शामिल था।


zainab ansari rape


इंसाफ की चली मुहिम


दुष्कर्म व हत्या की इस घटना के बाद कासुर जिले में दंगा भड़क गया था, जिसमें पुलिस के साथ हुई झड़प में दो लोगों की मौत भी हो गई थी। पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, आरोपी ने बच्ची के घर के बाहर से ही उसका अपहरण कर लिया गया था। फौरी तौर पर हुई जांच में सामने आया कि आरोपी कोई अनजान नहीं, बल्कि बच्ची का 24 वर्षीय पड़ोसी इमरान अली था। गिरफ्तारी के बाद इमरान ने कबूला कि वह जैनाब से पहले भी 10 नाबालिग लड़कियों का रेप और पांच नाबालिग लड़कियों की हत्या कर चुका है। 17 फरवरी 2018 को पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधी अदालत ने सीरियल किलर इमरान अली को मौत की सज़ा सुनाई। मामले की संजीदगी को देखते हुए काफी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कोर्ट लखपत जेल के एटीसी जज सज्जाद हुसैन ने आरोपी इमरान अली को बच्ची के अपहरण, नाबालिग से बलात्कार, उसकी हत्या और एंटी टेररिज्म की धारा 7 के तहत आतंक की गतिविधि के लिए सजा सुनाई। देश के इतिहास में यह पहला मौका है, जब महज चार दिनों में किसी मामले की सुनवाई को पूरा करते हुए पीड़ित को इंसाफ मिला हो। कोर्ट ने आरोपी को ताउम्र कैद, मौत की सज़ा और 3.2 मिलियन का जुर्माना भरने का फैसला सुनाया है।


भारत में फूटा जनता का गुस्सा


अभी सब पाकिस्तान में आरोपी को मिली सजा के बारे में बात कर ही रहे थे कि भारत के अरुणाचल प्रदेश में भी एक 5 वर्षीय बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या का मामला सामने आ गया। हालांकि, यहां इंसाफ के मामले में एक नया पहलू देखने को मिला। लोगों का शायद न्याय व्यवस्था पर से विश्वास इतना अधिक उठ चुका है कि उन्होंने कोर्ट की सुनवाई में वक्त बर्बाद करने के बजाय खुद ही आरोपियों को सजा दे दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 12 फरवरी को इस बच्ची का अपहरण हुआ था और पांच दिन बाद उसका नग्न शव एक चाय बागान से मिला था। आरोपी इतने निर्मम थे कि बच्ची का सिर तक काट दिया था। इस मामले में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से एक ने बच्ची के अपहरण और रेप के गुनाह को स्वीकार कर लिया था। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था और देखते ही देखते लगभग 1000 लोगों की भीड़ ने थाने को घेर लिया था। उनमें से कुछ लोग आरोपियों को लॉकअप से बाहर खींच लाए थे, जिसके बाद भीड़ ने दोनों को पीट-पीट कर मार डाला था। दोनों आरोपियों के शवों को बाजार में फेंक कर लोग वहां से भाग खड़े हुए थे। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मामले की जांच का आदेश देते हुए कहा है कि पुलिस अपना काम कर रही थी, ऐसे में लोगों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए था।


सीएम पेमा खांडू शायद भूल चुके हैं कि भारत की जनता अभी भी 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में घटे निर्भया कांड को भूली नहीं है। उस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट होने के बावजूद लोग सालों तक इंसाफ की आस करते रहे थे और सही मायने में देखा जाए तो अभी तक वह केस खत्म नहीं हुआ है। निर्भया कांड के बाद देश में ऐसी घटनाएं बढ़ती ही गईं, जिनमें खुलासा होने के बावजूद रेप पीड़ित लड़कियां/महिलाएं व उनके परिजन इंसाफ की आस में दर-दर भटक रहे हैं। कितनी ही बार पीड़ितों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसे कि वे पीड़ित न होकर खुद ही आरोपी हों। ऐसे में देश की कानून व्यवस्था को जैनाब अंसारी केस में पाकिस्तान के इस फैसले से कुछ सीखना चाहिए। इससे आरोपियों के घृणित इरादे तो परस्त होंगे ही, लोग भी दोबारा देश के कानून पर आंख मूंद कर भरोसा कर सकेंगे।


Images : Daily Express, CBS News, The National

प्रकाशित - फरवरी 20, 2018
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