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फिल्म रिव्यू : सच्चाई से दूर लेकिन जागरूकता से भरपूर है

फिल्म रिव्यू : सच्चाई से दूर लेकिन जागरूकता से भरपूर है "पैडमैन"

लीक से हटकर अनेक गंभीर मुद्दों पर फिल्म बनाने वाले निर्देशक आर. बाल्की को इस फिल्म में मेंस्ट्रुअल हाइजीन यानि माहवारी के दौरान साफ- सफाई रखने के मुद्दे को लाइम लाइट में लाने के लिए साधुवाद। यह बिलकुल सच है कि महिलाओं से जुड़े इस मुद्दे पर इस फिल्म के माध्यम से जो बहस शुरू हो गई है, वह अब हमारे समाज में कुछ तो परिवर्तन लाकर ही रहेगी। अब तक हमारे देश में, हमारे समाज में महिलाओं की माहवारी को लेकर इतने सारे अंधविश्वास व्याप्त रहे हैं जो आज के दौर में अनावश्यक हो चुके हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि पीरियड के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने और समाज में इसको लेकर खुलकर होने वाली चर्चा के मामले में अपने रिलीज़ से पहले ही यह फिल्म कामयाब हो चुकी है।


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दूसरी ओर यदि फिल्म की बात की जाए तो एक सच्ची घटना पर आधारित इस फिल्म की कहानी अच्छी है, अक्षय कुमार, राधिका आप्टे और सोनम कपूर समेत सभी कलाकारों की एक्टिंग बेहतरीन है लेकिन फिल्म कई जगह अपनी पकड़ खो बैठती है और खींची  गई सी प्रतीत होती है। फिल्म में हमारे जुगाड़प्रिय देश की ही तरह जुगाड़ू दिमाग के धनी अक्षय कुमार के कैरेक्टर पैडमैन यानि लक्ष्मी कई जगह दर्शकों को हंसाते भी हैं। फिल्म के संवाद बहुत अच्छे हैं।


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अक्षय की फिल्म- टॉयलेट- एक प्रेम कथा की ही तरह यह फिल्म भी पहले हिस्से में अपनी गति बनाए रखती है और दर्शकों की रुचि बनाए रखती है, लेकिन इसका भी दूसरा हिस्सा कुछ लचर हो जाता है। यहां कहीं फिल्म डॉक्युमेंट्र सी लगती है और कहीं सच्चाई से दूर महसूस होती है। फिल्म में पैडमैन बने अक्षय कुमार की समय- समय पर औरतों वाले इस मुद्दे पर ज्यादा रुचि लेने के लिए होने वाली बेइज्जती के बावजूद सस्ते पैड बनाने की धुन जहां कहानी को हास्य के बावजूद गंभीर बना देती है, वहीं पैडमैन को पैड बनाने की सस्ती मशीन बनाने के लिए पद्मश्री मिलना और संयुक्त राष्ट्र तक जाकर स्पीच देना इसे अनरियलिस्टिक बना देता है।


हमारे देश में न जाने ऐसे कितने ही जुगाड़ू भाड़ झोंक रहे हैं, जिनके बारे में कोई नहीं जान पाता, जबकि यहां एक परी (सोनम कपूर) इस पैडमैन को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाती है। सोनम फिल्म में एक ताजा हवा का झोंका बनकर आई हैं और अपने कैरेक्टर और एक्टिंग से उन्होंने दर्शकों का दिल भी जीता है, लेकिन एक ग्रामीण लक्ष्मी के साथ उनके प्यार हो जाने को दर्शक पचा नहीं पाता। हालांकि लक्ष्मी के अपनी पत्नी के प्रति प्यार ने भारतीय दर्शकों की रूढ़िवादी सोच और हैप्पी एंडिंग की की पसंद पर फिर से मुहर लगा दी है।

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अमित त्रिवेदी के संगीत के साथ फिल्म के गीत- 'पैडमैन पैडमैन', 'हूबहू' और 'आज से मेरा हो गया' आदि गाने पहले ही हिट हैं। अगर आप फिल्म एक्टिंग और खास मुद्दों के लिए देखते हैं तो यह फिल्म आपको अच्छी लगेगी, लेकिन यदि आप सिर्फ खालिस मनोरंजन के लिए फिल्म देखना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।


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प्रकाशित - फरवरी 9, 2018
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