अब छोड़ दें पति को ताना मारना, नहीं तो हो सकता है क्रूरता का मुकदमा

अब छोड़ दें पति को ताना मारना, नहीं तो हो सकता है क्रूरता का मुकदमा

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभी पिछले ही दिनों एक मामले में ताना मारने को घरेलू हिंसा और पति के खिलाफ क्रूरता बताया है। हाई कोर्ट ने पत्नी के तानों को क्रूरता मानते हुए एक 62 साल के पति की तलाक की अपील पर मुहर लगा दी। यह व्यक्ति अपनी पत्नी का गोद नहीं भर सका था और इसलिए उसे पत्नी उसे ताने मारते थी। इस व्यक्ति ने 1995 में फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी डाली थी। वर्ष 2010 में फैमिली कोर्ट ने तलाक की इस अर्जी को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद इस व्यक्ति फैमिली कोर्ट के इस फैसले को मुंबई हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद मुंबई हाईकोर्ट में जस्टिस केके तातेड़ और जस्टिस एसके कोटवाल की डिविजन बेंच ने इस मामले में तलाक की मंजूरी दे दी।


अपनी याचिका में पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उसके साथ अच्छा बर्ताव नहीं करती। उसने अपनी पत्नी के खिलाफ घरेलू हिंसा की ऐसी अनेक शिकायतें कीं, जो क्रूरता की श्रेणी में आती हैं। इस व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि गर्भधारण न कर पाने के लिए भी उसकी पत्नी उसे ही दोषी ठहराती है। इन दोनों की शादी वर्ष 1972 में हुई थी, लेकिन आपसी मनमुटाव के कारण वे 1993 से अलग रह रहे थे। इस मामले में कोर्ट ने पति से अपनी तलाकशुदा पत्नी को हर महीने खर्च देने का निर्देश दिया और जिस फ्लैट में महिला रहती है, उसे लेकर भी विवाद न करने को कहा है।


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