नसीरुद्दीन शाह की बेटी हीबा शाह की फिल्म ‘भ्रम’ को आप भी दे सकते हैं अपना सपोर्ट

नसीरुद्दीन शाह की बेटी हीबा शाह की फिल्म ‘भ्रम’ को आप भी दे सकते हैं अपना सपोर्ट

जानेमाने फिल्म कलाकार नसीरुद्दीन शाह की बेटी हीबा शाह अभिनीत फिल्म भ्रम को पूरा करने के लिए फिल्म के राइटर- डायरेक्टर कुमार रितुराज फंड जुटाना चाहते हैं, जिसके लिए उन्होंने विशबेरी का सहारा लिया है। इस फिल्म की कहानी टाइम थ्योरी की दुनिया के बारे में बताती है और इसे डिप्रेशन यानि अवसाद से कनेक्ट करती है। इस तरह की कहानी अब से पहले इंडियन सिनेमा में कभी नहीं देखी गई है। भ्रम एक पूर्ण अवधि की फीचर फिल्म है जो इसकी केंद्रीय किरदार मनोरमा की जिंदगी के इर्द गिर्द घूमती है। मनोरमा, जो एक दुर्घटना में अपने पूरे परिवार को खोने के बाद डिप्रेशन से गुज़र रही है। वो जिंदगी की असलियत से दूर धीरे- धीरे डिप्रेशन और अंधेरे में डूबती जा रही है। फिर धीरे- धीरे वह समय और प्रकृति के बीच के कनेक्शन को समझना शुरू कर देती है। इसका एक वीडियो क्लिप आप यहां देख सकते हैं-

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फिल्ममेकर कुमार रितुराज के बारे में


कुमार रितुराज पटना के रहनेवाले हैं और उन्होंने स्कॉलरशिप पर विसलिंग वुड्स नाम के इंस्टीट्यूट से फिल्ममेकिंग का कोर्स किया है। पिछले पांच सालों से वे असिस्टेंट कैमरामैन, राइटर, डायरेक्टर का काम कर रहे थे और पिछले दो सालों से वे इस फिल्म भ्रम पर काम कर रहे हैं।


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फिल्म की कहानी के पीछे की प्रेरणा


फिल्म के कथाकार, निर्देशक और प्रोड्यूसर कुमार रितुराज का कहना है कि इसकी कहानी एक दिन अचानक मेरे सामने आ गई। उस दौरान मेरी भी हालत काफी कुछ मनोरमा जैसी ही थी। मुझे महसूस हो रहा था कि जैसे मैं समय का गुलाम हूं और समय के कभी खत्म न होनेवाले लूप में फंस गया हूं। उस वक्त मैं न आगे बढ़ पा रहा था और न ही पीछे। मैं बस डिप्रेस्ड था और ऐसा लग रहा था कि मैं कितनी भी कोशिश करूं, इस परिस्थिति से बाहर नहीं आ पाऊंगा। फिर धीरे- धीरे मैंने टाइम थ्योरी के बारे में पढ़ना शुरू किया और फिर अपने अनुभवों के आधार पर मैंने इसे अपनी स्थिति के साथ समझा और यहीं से भ्रम की कहानी की शुरूआत हुई। बेसिकली, भ्रम के केंद्र में यह है कि कैसे हम सभी इंसान अपनी पूरी जिंदगी एक ऐसे भ्रम में जीते हैं, जहां हम छोटी- छोटी बातों को राई का पहाड़ बना लेते हैं, जबकि हमें अपनी जिंदगी के हर पल को एन्जॉय करना चाहिए, क्योंकि हम जीवित हैं।   


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कास्ट और क्रू


रितुराज कहते हैं कि मेरे पास कोई बड़ा बजट नहीं था लेकिन मैं खुशनसीब था कि मुझे एक ऐसी टीम मिल गई जिसे मेरी स्टोरी और मुझ पर भरोसा था। मेरे क्रू मेम्बर्स को मेरी फिल्म की कहानी इतनी पसंद आई कि इसके लिए मेरे ज्यादातर क्रू मेम्बर्स ने मुफ्त में काम किया है।


फिल्म की कहानी


रितुराज बताते हैं कि इस इस फिल्म की कहानी एक ऐसे विषय पर है जो आज की जेनरेशन की एक बहुत बड़ी समस्या है - तनाव, अवसाद यानि डिप्रेशन। हालांकि इस मुद्दे पर अब तक बहुत सी नामी फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन उनमें से किसी ने भी इसकी थीम को टाइम थ्योरी के नज़रिये ने नहीं उठाया है।


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इस फिल्म की केंद्रीय किरदार मनोरमा, एक लेखिका बनना चाहती है, लेकिन जब वह अपने इस सपने को पूरा करने के लिए शहर पहुंचती है तो उसकी पूरी दुनिया ही उजड़ जाती है। उसे पता लगता है कि एक कार दुर्घटना में वो अपने पूरे परिवार को खो चुकी है। वह गहरे अवसाद में चली जाती है, जहां से फिर वो धीरे- धीरे वापस आती है- कैसे, यह आपको फिल्म देखने के बाद ही पता लगेगा।


क्राउडफंडिंग की जरूरत क्यों ?


रितुराज कहते हैं कि यह कहानी मेरे लिए इसलिए बहुत महत्वपूर्ण थी क्योंकि मैं खुद इस स्थिति से गुज़र चुका हूं।  लेकिन मैंने अब तक अपनी सारी निजी बचत इस फिल्म में लगा दी है, लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म पूरी कर पाना मेरे वश से बाहर की बात है, क्योंकि फिल्म बनाना आज के समय में बहुत महंगा सौदा है और इसीलिए मुझे आप सभी लोगों की ज़रूरत है।


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फिल्म का बजट और खर्च


फिल्म का शूट पूरा हो चुका है और तैयार है, सिर्फ इसकी कहानी और इसके लिए काम करने वाले क्रू की मेहनत को बड़े परदे पर जनता तक पहुंचाने के लिए जनता की सपोर्ट की जरूरत है। कुल मिलाकर इस फिल्म का बजट है 12 लाख रुपये, जिसमें से एडिटिंग, साउंड मिक्सिंग पर खर्च किया जाएगा 3 लाख, 1.5 लाख रुपये इसके संगीत का खर्च, 3.5 लाख रुपये डीसीपी मेकिंग के लिए, 2 लाख रुपये वीएफएक्स, 1 लाख रुपये फोले और 1 लाख रुपये नेशनल- इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में शामिल होने के लिए चाहिए।


अगर आप इस फिल्म “भ्रम” के लिए कोई राशि देना चाहते हैं तो विशबेरी क्राउडफंडिंग के इस लिंक पर क्लिक करके अपना योगदान दे सकते हैं।


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