बाल विवाह को रोकना और बाल शिक्षा देश के विकास के लिए गेम चेंजर: प्रियंका चोपड़ा

बाल विवाह को रोकना और बाल शिक्षा देश के विकास के लिए गेम चेंजर: प्रियंका चोपड़ा

यूनिसेफ की ग्लोबल गुडविल अम्बेसडर प्रियंका चोपड़ा ने कहा है कि किशोर लड़कियों के सशक्तीकरण के लिए किए जाने वाले सतत प्रयास हमारे देश के विकास में योगदान दे सकते हैं। कम उम्र में लड़कियों की शादी पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘कम उम्र में लड़कियों की शादी करने से उसकी पढ़ाई छूटने और उसके घरेलू हिंसा का शिकार होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। वह उस नाजु़क उम्र में मां बन जाती हैं, जब वह खुद बच्ची होती हैं। गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के दौरान उनकी मृत्यु की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है।


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भारत में 2430 लाख किशोर हैं, जो देश की आबादी का एक चौथाई हिस्सा बनाते हैं। ऐसे में इन किशोरों के सामाजिक- आर्थिक विकास के लिए समन्वित प्रयास किये जाने बेहद ज़रूरी हैं, साथ ही उनके सशक्तीकरण पर ध्यान देना भी बहुत ज़रूरी है। बाल विवाह को रोकना और इन बच्चों को माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध कराना भारत के भावी विकास के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।


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उन्होंने कहा कि किशोरावस्था अवसरों की अवस्था है, साथ ही यह उम्र बेहद संवेदनशील होती है। जहां एक ओर किशोर लड़कियांं को बाल विवाह, स्कूली शिक्षा छूटने, लिंग भेद, घरेलू एवं सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा, कार्यस्थलों पर सीमित अवसरों और कम वेतन जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, वहीं किशोर लड़के बाल मजदूरी और पढ़ाई छूटने जैसी समस्याओं का शिकार हो जाते हैं। इस मौके पर एक विशेष अध्ययन रिपोर्ट भी जारी की गई। यूनिसेफ द्वारा अब्दुल लतीफ जमील, पावर्टी एक्शन लैब के सहयोग से किए गए इस अनुसंधान के माध्यम से किशोरों की सामाजिक सुरक्षा के उपायों पर रोशनी डाली गई। इसके तहत बताया गया कि किशोर आबादी देश की महत्वूपर्ण संपत्ति है जिसकी अक्सर उपेक्षा की जाती है। किशोर अक्सर विभिन्न आंकड़ों से बाहर रहते हैं। ज़्यादातर प्रोग्रामों में बच्चों या युवाओं पर ध्यान दिया जाता है। किशोर शिक्षा एवं प्रशिक्षण में निवेश द्वारा देश में ऐसे उत्पादक कार्यबल का निर्माण किया जा सकता है जो देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सके।


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प्रियंका चोपड़ा ने इस मौके पर यह भी कहा कि आज के किशोरों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सही सहायता के द्वारा हम उनके जीवन में सुधार ला सकते हैं, उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नागरिक बना सकते हैं, जो अपने समाज के विकास में योगदान दे सकें। किशोरों में निवेश लाखों लोगों को गरीबी के जाल से बाहर निकालकर एक रचनात्मक एवं कुशल कार्यबल का निर्माण कर सकता है।


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