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यौन शोषण से अपने बच्चे की सुरक्षा चाहते हैं तो change.org के इस अभियान से जुड़ें

यौन शोषण से अपने बच्चे की सुरक्षा चाहते हैं तो change.org के इस अभियान से जुड़ें

वो एक चार साल का बच्चा था जिसके साथ यौन शोषण हुआ। और ऐसा करने वाला एक विश्वसनीय फैमिली मेम्बर था। उस बच्चे के लिए यह समझना बेहद मुश्किल था कि यह सब क्या हो रहा है। फिर जब वह 8 साल का हुआ तो उसके अपार्टमेंट के केयरटेकर ने खेलने का बहाना बनाकर वही सब किया जो उसके साथ पहले भी हो चुका था। जब उसने अपने घर में यह बताया तो सबने इसे हंसी में टाल दिया।


कोई बच्चा नहीं है सुरक्षित


जो उस बच्चे के साथ हुआ, वह देशभर में हजारों बच्चों के साथ अब भी रोजाना हो रहा है। ऐसे खतरनाक समय में लड़का हो या लड़की, कोई भी सुरक्षित नहीं है। यही वजह है कि देश के स्कूलों में पर्सनल सेफ्टी एजुकेशन अनिवार्य होनी जरूरी है।


उस बच्चे के 19 साल का होने तक यह सब हुआ, लेकिन इस बात को किसी ने नोटिस नहीं किया कि वह बच्चा किस तरह की परिस्थितियों से गुजर रहा हैI इस वजह से उसकी पढ़ाई को ही नुकसान नहीं हुआ बल्कि अच्छे मार्क्स नहीं लाने के लिए भी उसे ही आरोपित किया गया। लेकिन कोई भी उसके साथ हो रहे तनाव को नहीं देख सका, न ही उसकी समस्याओं को समझ सका। यहां तक कि किसी को उसके शरीर पर पड़े कोई निशान तक नहीं दिखे।


बर्बाद होता बचपन


एक बच्चे का पूरा बचपन बर्बाद हो गया। वह शुरूआत से कोई सुरक्षित ठिकाना तलाश करता रहा, लेकिन इसके बारे में खुलकर बात करना हमारे देश में आसान नहीं था।


child abuse


बच्चों को यह जानना बेहद जरूरी है कि कैसे सुरक्षित रहा जाए और कैसे अपने लिए खतरा बन रहे लोगों को पहचान कर उनसे दूर रहा जाए। शिक्षकों और दूसरे स्टाफ मेम्बर्स को भी सीखना चाहिए कि कैसे किसी बच्चे के साथ हो रहे यौन शोषण को उसके लक्षणों के माध्यम से पहचाना जाए और बच्चे और उसके अभिभावकों को काउंसलिंग के माध्यम से यौन शोषण से बचना और बचाना सिखाया जाए।  


विश्वसनीय शिक्षक जरूरी


कोलकाता की प्रनाधिका सिन्हा देवबर्मन का मानना है कि देश के हर बच्चे को, जो ऐसी स्थितियों से जूझ रहा है या फिर जिसे ऐसी स्थितियों से जूझने की आशंका है, उसके लिए एक ऐसा टीचर जरूर होना चाहिए, जिसपर वह विश्वास कर सके और जिससे वह मदद मांग सके। एक ऐसा टीचर जो बच्चे की ऐसी बातों का मज़ाक न बनाए, ऐसे वॉर्निंग साइन्स को अनदेखा न करे और सबसे खास बात कि वह हमेशा बच्चे के लिए मौजूद हो।


पर्सनल सेफ्टी एजुकेशन अनिवार्य हो


प्रनाधिका सिन्हा देवबर्मन ने #onemillionagainstabuse के तहत Change.org वेबसाइट पर एक पेटीशन डाली है और इसे केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को भेजा है। इसके अलावा उन्होंने अपने आर्टिकल Teach Kids & Teachers How To Fight Sexual Abuse: Make it part of the syllabus के माध्यम से देश के दो सबसे बड़े स्कूल बोर्ड- सीबीएसई और आईएससीई से भी मांग की है कि पर्सनल सेफ्टी एजुकेशन को अपने सिलेबस का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। उनका कहना है कि इससे भारत के लाखों बच्चों के भविष्य पर असर पड़ेगा।


पेटीशन को आप भी करें साइन


प्रनाधिका की इस पेटीशन को अब तक 61657 लोग साइन कर चुके हैं। आप भी इसे साइन करें, ताकि यह संख्या कम से कम 75 हजार हो जाए, ताकि देश के कानून निर्माता, सरकार और दोनों प्रमुख शिक्षा बोर्ड भी जानें कि देश के ज्यादातर नागरिक अपने बच्चों की सुरक्षा की परवाह करते हैं और उन्हें सुरक्षित देखना चाहते हैं।

प्रकाशित - नवम्बर 22, 2017
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